
जीपीएम के 11 लोक कलाकारों को मिला ‘लोकधरा गौरव सम्मान’
रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में हुआ सम्मान, लोक संस्कृति के संरक्षण में योगदान के लिए मिली सराहना

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के लोक कलाकारों ने प्रदेश स्तर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का नाम रोशन किया है। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और कला के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए जिले के 11 लोक कलाकारों को राजधानी रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय ‘लोकधरा गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।


छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के तत्वावधान में रायपुर के सत्संग भवन, पुरानी बस्ती में आयोजित सम्मान समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे लोक कलाकारों को उनकी कला एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। जीपीएम जिले से सम्मानित कलाकारों का चयन लोककला, संगीत, नृत्य, रंगकला, लोक साहित्य और पारंपरिक संस्कृति के क्षेत्र में उनके लंबे समय से किए जा रहे योगदान के आधार पर किया गया।


चयन प्रक्रिया जिला अध्यक्ष आशा कौशिक एवं प्रदेश अध्यक्ष गुरुदास मानिकपुरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। समारोह की मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि लोककला हमारी संस्कृति की आत्मा है और कलाकार उसका गौरव हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में लोक कलाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेष्वर पटेल, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, लोक गायिका आरू साहू, लोक कलाकार कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष गुरुदास मानिकपुरी, प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश गुप्ता एवं प्रदेश सचिव हृदय अनंत सहित विभिन्न जिलों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोक कलाकार उपस्थित रहे।
इन कलाकारों को मिला सम्मान
जीपीएम जिले से आशा कौशिक, ईश्वर पडवार, राम सिंह परतोती, उमर पोर्ते, शैलेश कुमार सोनी, बेसाहन सिंह टेकाम, घनश्याम पंत, जुगेश्वर बसंत, धर्मेंद्र कौशिक, कौशल भरिया और प्रदीप पनरिया को ‘लोकधरा गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।
एक ही जिले के 11 लोक कलाकारों को प्रदेश स्तरीय सम्मान मिलना जिले के लिए गौरव का विषय है। सम्मानित कलाकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति केवल कला नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान और सांस्कृतिक विरासत है। इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना कलाकारों और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।















